स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस का जन्म फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर हुआ था। इस साल ये तिथि मंगलवार, 25 फरवरी को है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार परमहंसजी का जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के कामारपुर में हुआ था। उनकी मृत्यु 16 अगस्त 1886 को कोलकाता में हुई थी। परमहंसजी के जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें सुखी और सफल जीवन के सूत्र छिपे हैं। यहां जानिए एक ऐसा प्रसंग, जिसमें बताया गया है कि हम अपने लक्ष्य तक कैसे पहुंच सकते हैं...
चर्चित प्रसंग के अनुसार एक बार रामकृष्ण परमहंस अपने शिष्य के साथ टहलते हुए नदी किनारे पहुंचे। किनारे पर उन्होंने देखा कि कुछ मछुआरे मछलियां पकड़ रहे हैं। परमहंसजी ने शिष्य से कहा कि जाल में फंसी इन मछलियों को ध्यान से देखो।
शिष्य देखा जाल में कई मछलियां फंसी हुई थीं। गुरु ने कहा कि इस जाल में तीन तरह की मछलियां हैं। पहली वो जो ये मान चुकी हैं कि अब उनका जीवन समाप्त हो गया है। इस कारण वे प्राण बचाने का प्रयास ही नहीं कर रही हैं। दूसरी मछलियां वे हैं जो बचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन जाल से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। तीसरे प्रकार की मछलियां सबसे खास हैं, जो जाल से बाहर निकलने की कोशिश कर रही हैं। ये मछलियां बाहर निकलने में कामयाब भी हो गई और प्राण बचाकर तैरकर दूर निकल गई हैं।
इसी तरह इंसानों के भी तीन प्रकार हैं। पहले वे लोग हैं, जिन्होंने जो परेशानियों को और दुखों को अपना भाग्य मानकर इन्हीं हालातों में मरने की प्रतिक्षा कर रहे हैं। दूसरे वे लोग हैं, जो दुखों को दूर करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें मुक्ति का कोई मार्ग नहीं मिल पा रहा है। तीसरे वे लोग हैं जो प्रयास भी करते हैं और अपने लक्ष्य तक पहुंचते भी हैं। अगर हम किसी लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं तो उसके लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। प्रयास तब तक करना चाहिए, जब तक कि सफलता न मिल जाए।